Gautam Buddha Nagar, India / Published By Ajay Arora / 05 Oct 2026, 04:51 PM

UP छात्रवृत्ति: ₹54,950 ने संभाली विनीत की B.Tech

गौतमबुद्धनगर के 21 वर्षीय विनीत सैनी की B.Tech की पढ़ाई सीमित पारिवारिक आय के दबाव में थी। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओबीसी छात्रवृत्ति के तहत सत्र 2025-26 के लिए उन्हें ₹54,950 मिले। यही रकम फीस, परीक्षा शुल्क और किताबों के खर्च में काम आई। यह यूपी छात्रवृत्ति योजना का वह चेहरा है, जो चुपचाप कई परिवारों की किस्मत बदलता है। मगर इस योजना का दूसरा चेहरा भी है, जिसकी पड़ताल इस रिपोर्ट के आगे के हिस्सों में है।

फीस की चिंता से किताबों तक: विनीत की कहानी

विनीत ओबीसी वर्ग से आते हैं और जेएसएस कॉलेज, नोएडा में बी.टेक कर रहे हैं। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, गौतमबुद्धनगर की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक उनका सपना एक योग्य इंजीनियर बनना है। वे ऐसी तकनीक पर काम करना चाहते हैं, जो आम लोगों की मुश्किलें हल करे।

सपना बड़ा था, पर घर की आमदनी सीमित। विज्ञप्ति के अनुसार ट्यूशन फीस के साथ परीक्षा शुल्क, किताबें, अध्ययन सामग्री और आने-जाने का खर्च भी परिवार पर दबाव बढ़ा रहा था। ऐसे में आगे की पढ़ाई को लेकर चिंता बनी रहती थी।

जो छात्र इस दौर से गुजरे हैं, वे जानते हैं कि फीस की चिंता सिर्फ जेब पर नहीं, पढ़ाई पर भी असर डालती है। नोट्स बनाते समय दिमाग में हिसाब चलता रहे, तो एकाग्रता टूटती है। विनीत के मामले में छात्रवृत्ति ने यही दबाव घटाया।

विभाग के हवाले से विनीत का कहना है कि स्कॉलरशिप ने ट्यूशन फीस, एग्जाम फीस और पढ़ाई के सामान का खर्च उठाकर परिवार का बोझ काफी हल्का किया। अब वे करियर पर ज्यादा ध्यान लगा पा रहे हैं और तकनीकी कौशल बढ़ाने में जुटे हैं।

₹54,950 की रकम कितनी बड़ी है? एक सीधा गणित

अब सवाल यह कि ₹54,950 एक इंजीनियरिंग छात्र की जरूरतों के सामने कहां ठहरती है। विभाग ने विनीत की कुल फीस का ब्योरा जारी नहीं किया है, इसलिए सटीक अनुपात बताना संभव नहीं। फिर भी एक अंदाजा लगाया जा सकता है।

जेएसएस एकेडमी ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, नोएडा की अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध 2023-24 बैच की फीस सूची में बी.टेक का कुल शुल्क करीब ₹1.37 लाख दर्ज है। उसमें ट्यूशन फीस अस्थायी रूप से लगभग ₹1.13 लाख बताई गई थी। वहीं 2026 के लिए कुछ निजी कॉलेज-सूचना पोर्टलों पर सालाना फीस करीब ₹1.24 लाख दिखती है। अलग-अलग स्रोतों में आंकड़े भिन्न हैं, इसलिए इन्हें सिर्फ मोटा पैमाना मानना चाहिए।

इस पैमाने पर ₹54,950 एक साल की फीस का लगभग 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा बैठता है। यह सारा बोझ नहीं उठाता, पर उसे इतना हल्का जरूर करता है कि परिवार के लिए बाकी रकम जुटाना संभव हो जाए। यह हमारा आकलन है, विभाग का दावा नहीं। विनीत की वास्तविक फीस इससे अलग भी हो सकती है।

कौन-सी योजना, कौन पात्र? जानिए नियम

बी.टेक जैसे स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए यह लाभ दशमोत्तर छात्रवृत्ति (कक्षा 11-12 के अलावा) श्रेणी में आता है। आवेदन उत्तर प्रदेश के आधिकारिक पोर्टल scholarship.up.gov.in पर होता है। ओबीसी छात्रों के लिए इसे पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग देखता है।

हालांकि विभाग की विज्ञप्ति में योजना की उप-श्रेणी का नाम स्पष्ट नहीं लिखा गया है। यह निष्कर्ष विनीत के ओबीसी वर्ग, बी.टेक पाठ्यक्रम और विभाग के नाम से निकलता है।

शिक्षा-पोर्टल इंडिया स्कॉलरशिप्स के मुताबिक इस श्रेणी में स्नातक, परास्नातक, डिप्लोमा और आईटीआई जैसे पाठ्यक्रम आते हैं, और ओबीसी छात्रों की पारिवारिक वार्षिक आय की सीमा ₹2 लाख है। बड्डी4स्टडी की 2026-27 की सूची में भी सामान्य, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए दशमोत्तर योजना की यही सीमा दर्ज है। एससी-एसटी के लिए सीमा ₹2.5 लाख है।

एक और नियम अक्सर नजरअंदाज हो जाता है। इंडिया स्कॉलरशिप्स के अनुसार नवीनीकरण केवल उसी पाठ्यक्रम में मान्य है, जिसमें पहली बार पंजीकरण हुआ था। पाठ्यक्रम बदलने पर नया आवेदन करना पड़ता है।

आंकड़ों में यूपी की छात्रवृत्ति: करोड़ों का बजट, लाखों लाभार्थी

विनीत की कहानी अकेली नहीं है। पिछले साल अक्टूबर में पीटीआई ने बताया था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एक कार्यक्रम में 10,28,205 छात्रों के खाते में ₹297.95 करोड़ भेजे। उसी कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 2016-17 तक प्रदेश में करीब 46 लाख छात्र छात्रवृत्ति के पात्र थे, जो अब बढ़कर 62 लाख हो गए हैं।

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के स्तर पर भी तस्वीर बड़ी है। यूएनआई की अप्रैल 2025 की रिपोर्ट के अनुसार विभाग ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति पर ₹1,981.45 करोड़ खर्च किए, जिससे 21.31 लाख छात्रों को लाभ मिला। प्री-मैट्रिक योजना में ₹168.75 करोड़ के साथ 7.94 लाख छात्र जुड़े।

पीटीआई की मई 2025 की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार ने 2024-25 में पिछड़ा वर्ग के करीब 30 लाख छात्रों पर ₹2,475 करोड़ के रिकॉर्ड आवंटन की बात कही। यहां एक बारीकी समझना जरूरी है। यूएनआई के दोनों योजनाओं के जोड़ (लगभग ₹2,150 करोड़) और पीटीआई के ₹2,475 करोड़ में अंतर है। संभवतः दोनों आंकड़े अलग मदों या अलग पैमानों (आवंटन बनाम खर्च) पर आधारित हैं। रिपोर्टों में इसका स्पष्टीकरण नहीं मिलता। इसलिए आंकड़ों को स्रोत के साथ ही पढ़ना ठीक रहेगा।

फिर भी साफ है कि यह राज्य के शिक्षा बजट की एक बड़ी मद है, और लाखों परिवार इस पर निर्भर हैं।

दूसरा पहलू: 2025-26 में 3.16 लाख छात्र रह गए थे वंचित

अब कहानी का वह हिस्सा, जो विज्ञप्तियों में आम तौर पर नहीं दिखता। हर छात्र विनीत जितना भाग्यशाली नहीं रहा।

फ्री प्रेस जर्नल और करियरइंडिया की रिपोर्टों के अनुसार, समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि 2025-26 में 3,16,057 छात्र तकनीकी कारणों से दशमोत्तर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ नहीं पा सके। विभाग के निदेशक संजीव सिंह के हवाले से बताया गया कि इनमें सबसे बड़ा हिस्सा निजी संस्थानों के छात्रों का है।

समस्या की झलक पहले ही दिख चुकी थी। पत्रिका की 26 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक कई कॉलेजों का मास्टर डाटा लॉक न होने से छात्र पोर्टल पर आवेदन ही नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद समय-सारिणी बदली गई। सामान्य, ओबीसी और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख 14 जनवरी 2026 की गई, जबकि एससी-एसटी छात्रों के लिए 31 मार्च 2026।

यह मूल कार्यक्रम से काफी आगे खिसकना था। अमर उजाला की जून 2025 की रिपोर्ट में आवेदन 2 जुलाई से शुरू होने और राशि 31 दिसंबर तक खातों में पहुंचाने का लक्ष्य बताया गया था।

राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठे। भीम आर्मी प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर कहा कि उनके दफ्तर में बड़ी संख्या में छात्रों की शिकायतें आ रही हैं। द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने भुगतान में देरी, पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ियां, आधार-बैंक खाता लिंकिंग की दिक्कतें और संस्थानों द्वारा समय पर आवेदन आगे न भेजने जैसी समस्याएं गिनाईं। उन्होंने पोर्टल दोबारा खोलने और विशेष शिविर लगाने की मांग भी की।

क्या यह सिर्फ यूपी की समस्या है? राष्ट्रीय तस्वीर

नहीं। करियर्स360 न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के आंकड़े दिखाते हैं कि 2020-21 से 2024-25 के बीच एससी, एसटी और ओबीसी के लिए चल रही नौ योजनाओं में करीब 89 लाख लाभार्थी घटे। रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने अनिवार्य आधार उपयोग और राशि जारी होने में देरी को कारण बताया।

ध्यान रहे, ये राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े हैं, किसी एक राज्य के नहीं। इसलिए इन्हें उत्तर प्रदेश की स्थिति पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। पर पैटर्न मिलता-जुलता है। मेघालय में भी आधार और बैंक खाते के बीच जुड़ाव न होने से हजारों छात्रों का भुगतान अटकने की खबर नेनाउ ने दी थी। यानी डिजिटल पारदर्शिता जितनी जरूरी है, उसकी तकनीकी बाधाएं उतनी ही असली हैं।

सरकार का कदम: पोर्टल दोबारा खुला, भुगतान की तारीख तय

छूटे हुए छात्रों के लिए सरकार ने राहत की घोषणा की। फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार समाज कल्याण विभाग ने स्कॉलरशिप पोर्टल 1 सितंबर 2026 से दोबारा खोलने का फैसला किया। पात्र छात्रों की राशि 29 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच पीएफएमएस के जरिए सीधे बैंक खातों में भेजी जानी थी।

असीम अरुण ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि हर पात्र छात्र को लाभ मिले। यह सरकार का आधिकारिक पक्ष है। यह भी स्पष्ट रहे कि इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक हमें स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली कि 3.16 लाख में से कितने छात्रों तक भुगतान पहुंच चुका है। यह आंकड़ा विभाग से पूछे जाने योग्य है।

विनीत के बाद अगला नंबर आपका? 2026-27 में क्या करें

अगर आप या आपके घर का कोई विद्यार्थी स्नातक, डिप्लोमा या आईटीआई में है, तो समय की गिनती शुरू हो चुकी है। करियर्स360 न्यूज और बड्डी4स्टडी की सूचियों के अनुसार सत्र 2026-27 में दशमोत्तर (कक्षा 12 के बाद) छात्रवृत्ति के लिए नए आवेदकों का पंजीकरण 15 सितंबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।

आज 5 अक्टूबर है, यानी आखिरी तारीख में करीब चार हफ्ते बचे हैं। पोर्टल पर अंतिम दिन अक्सर भीड़ रहती है, इसलिए पहले से तैयारी बेहतर है। आवेदन से पहले इन बातों की जांच कर लें:

  • आधार से जुड़ा बैंक खाता और डीबीटी सुविधा सक्रिय हो। पत्रिका की रिपोर्ट में विभाग ने भी यही सलाह दी थी।
  • जाति और आय प्रमाणपत्र ऑनलाइन सत्यापन योग्य और वैध हों।
  • आवेदन के बाद अंतिम सबमिशन करना न भूलें। इंडिया स्कॉलरशिप्स के अनुसार अधूरे ड्राफ्ट आखिरी तारीख पर अपने आप खारिज हो सकते हैं।
  • कॉलेज में सत्यापन की स्थिति पर नजर रखें। छात्र का आवेदन सही होने पर भी संस्थान की देरी भुगतान रोक सकती है।
तिथियां बदल भी सकती हैं, जैसा पिछले सत्र में हुआ। इसलिए अंतिम पुष्टि scholarship.up.gov.in पर ही करें।

विनीत का आभार और आगे का रास्ता

विज्ञप्ति के अनुसार विनीत ने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया और कहा कि छात्रवृत्ति योजना उनके जैसे विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सहायता है। उनके लिए पढ़ाई सिर्फ डिग्री का रास्ता नहीं, बल्कि उस भविष्य की तैयारी है जिसका सपना उन्होंने देखा है।

आगे की चुनौती वही है जो हर बी.टेक छात्र की होती है: चार साल की पढ़ाई, तकनीकी कौशल और नौकरी की दौड़। फर्क इतना है कि छात्रवृत्ति ने उनकी पहली बाधा, यानी फीस की चिंता, हल्की कर दी।

निष्कर्ष

यूपी छात्रवृत्ति योजना की ताकत और कमजोरी, दोनों विनीत की कहानी के आसपास दिखती हैं। ताकत यह कि समय पर मिली ₹54,950 जैसी रकम एक इंजीनियर की राह बचा सकती है। कमजोरी यह कि तकनीकी अड़चनें और संस्थानों की देरी हजारों पात्र छात्रों को इस मदद से दूर कर देती हैं। 2026-27 की कसौटी यह होगी कि आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया कितनी सहज रहती है। अगली बार विनीत जैसी कहानी का मतलब यह होना चाहिए कि हर पात्र छात्र को वही राहत समय पर मिले।


     सौजन्य से पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, गौतमबुद्धनगर।

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